कैसी है यह जिंदगी-सूरज कुमार

कैसी है यह जिंदगी-सूरज कुमार

भूख लगी थी लेकिन खाने को खाना नही था,
अब खाना है तो भूख नही है।
पहले आराम था तो पैसा नही थे,
अब पैसा है तो आराम नही है।
पहले दौड़ते थे खेलने के लिए,
अब दौड़ता हूँ नौकरी के लिए
पता नही नौकरी के लिए जीत हूँ ,
या जीने के लिए नौकरी करता हूँ।
जवानी का सपना दिखा कर बचपन बीत गया,
और पैसा का सपना दिखा कर जवानी ले गया।

      सूरज कुमार
     दानापुर, पटना

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