कलम-मनीषा कुमारी

कलम-मनीषा कुमारी

म हूँ मैं’ रुकना काम नहीं है मेरा ,
बाधाओं से लड़ना पर थमना काम नहीं है मेरा ।
अपने बल से मैंने कई बार पलटा है तख्ता ,
मेरी स्याही बदल के रख दे कई चेहरों का नक्शा ।।
तलवार की धार से तेज है मेरी लेखनी की धार ,
एक बूंद लहू ना गिरे धरा पर हो प्रहार पर प्रहार ।
सच का साथ देता हूँ हरदम बुराई पर करता हूँ वार ,
इंसाफ की डगर पर चलने वाला मैं समाज का प्रहरी मैं पहरेदार ।।

                    मनीषा कुमारी                             

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