कलयुग-मुकेश नेगी

कलयुग-मुकेश नेगी

युगों-युगों से हुए महर्षि पहुँचे सब सचधाम
इस कलयुग मे कौन हुए जो जपे प्रभु का नाम ।
घोर पाप है इस जग मे बुराई हर जन काम
लूटमार है मची हर तरफ हो रहे कत्लेआम ।
जाति-जाति भेद किए करते हैं अपमान
हिन्दू और मुस्लिम कहकर एक-दूजे बदनाम ।
हाथों मे पिस्तौल लिए करते वाद-विवाद
जो है किसी के विरुद्ध उठे धो बैठे जान से हाथ ।
भाई कहे कोई बहन कहे कोई न समझें बात
कुदृष्टि से देख सभी कर बैठे अपराध ।
लोभ से जग है घिरा रह गई मानवता नाम रुके न अब फैली ये तबाही होगा बुरा अंजाम ।
व्दापर मे श्रीकृष्ण हुए त्रेता मे श्रीराम
देख बुराई कलयुग की निश्चिंत है कल्याण ।
हैरान हूँ खुद मैं देख यहाँ क्या होगा अब संसार
इस भूमि को कौन बचाए धरे नया अवतार ।

 

मुकेश नेगी

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