कर कुछ ऐसा – शोभित अवस्थी

कर कुछ ऐसा – शोभित अवस्थी

कर कुछ ऐसा विश्व सीख ले,भारत के गलियारों से।
कर कुछ ऐसा भारत निकले,अंधकार के द्वारों से।।
कर कुछ ऐसा विश्व मौज ले,घाटी के गलियारों में।
कर कुछ ऐसा बनें सुर्खियाँ,तेरी भी अखबारों में।।

भारत को फिर पुनः रंग दो,विश्व गुरू के चोले से।
इसके दुश्मन के घर को तुम,भर दो अपने शोले से।।
ऐसी तकनीकें तुम लाओ,अपने ज्ञान के गोले से।
दुश्मन धू-धू करता भागे,भारत माँ के रौले से।।

—शोभित अवस्थी

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