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कसम-कस जिन्दगी की – शुभम् लांबा

इस बर्गर जैसी हो गई है, जिन्दगी मेरी दों घेरों में घिरी हुई।
(स्वाभिमान😊 + मजबूरियां😔)
और जज्बात (कुछ खट्टे और कुछ मीठै) हमेशा ही बाहर आ जातें हैं 😓।

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शुभम् लांबा 

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Subham Lambha

Subham Lambha

मैं शुभम लाम्बा गुरुग्राम हरियाणा का निवासी हूँ। मैं वीर रस और श्रृंगार रस का कवि हूँ। मैं B. Tech Mechanical इंजिनीअर हूँ। और वर्तमान मे JSW Steel Ltd. Karnataka मे कार्य कर रहा हूँ।

7 thoughts on “कसम-कस जिन्दगी की – शुभम् लांबा”

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