कसम-कस जिन्दगी की – शुभम् लांबा

कसम-कस जिन्दगी की – शुभम् लांबा

इस बर्गर जैसी हो गई है, जिन्दगी मेरी दों घेरों में घिरी हुई।
(स्वाभिमान😊 + मजबूरियां😔)
और जज्बात (कुछ खट्टे और कुछ मीठै) हमेशा ही बाहर आ जातें हैं 😓।

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शुभम् लांबा 

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