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खफा हुँ खुदा से शायद – नेहा श्रीवास्तव

चलो आज कुछ नया करते है ,
अपने दुश्मनो के लिये भी दुआँ करते है.
किसके दिल मे कितनी नफरत है मेरे लिये आज फुर्सत से पता करते है.
चोट खाने का सिलसिला मेरा आज भी जारी है,
जो जख्म देते है हमे हम उन्ही की दवा करते है.
थाम ले जो हाथ अँधेरे मे भटकते हुए ,
ऐसे हमसफर मुक्कदर से मिला करते है.
सब समझते है मै खफा हुँ खुदा से शायद,
मस्जिद मे बैठ कर हम आज भी इल्तजा करते है.
हम तो कबका मर जाते ख्वाहिसो ने जिन्दा रखा ,
चलो आज मौत का ऐहसान अदा करते है.

Neha Srivastavaनेहा श्रीवास्तव
   उत्तर प्रदेश (बलिया)

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Neha Srivastava

Neha Srivastava

मैं नेहा श्रीवास्तव बलिया उत्तरप्रदेश की निवासी हूँ। मैं श्रृंगार रस की कवित्री हूँ। मैंने B.ED Science में शैक्षणिक योग्यता प्राप्त की है। मैंने साहित्य लाइव रंगमंच 2018 (राष्ट्रीय स्तर पर हिंदी प्रतियोगिता) में द्वितीय स्थान प्राप्त किया है।

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