खफा हुँ खुदा से शायद – नेहा श्रीवास्तव

खफा हुँ खुदा से शायद – नेहा श्रीवास्तव

चलो आज कुछ नया करते है ,
अपने दुश्मनो के लिये भी दुआँ करते है.
किसके दिल मे कितनी नफरत है मेरे लिये आज फुर्सत से पता करते है.
चोट खाने का सिलसिला मेरा आज भी जारी है,
जो जख्म देते है हमे हम उन्ही की दवा करते है.
थाम ले जो हाथ अँधेरे मे भटकते हुए ,
ऐसे हमसफर मुक्कदर से मिला करते है.
सब समझते है मै खफा हुँ खुदा से शायद,
मस्जिद मे बैठ कर हम आज भी इल्तजा करते है.
हम तो कबका मर जाते ख्वाहिसो ने जिन्दा रखा ,
चलो आज मौत का ऐहसान अदा करते है.

Neha Srivastavaनेहा श्रीवास्तव
   उत्तर प्रदेश (बलिया)

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