ख़ामोशी – सचिन ओम गुप्ता

ख़ामोशी – सचिन ओम गुप्ता

सुनो…तुम यूँ चुप से न रहा करो,
यूँ खामोश से जो हो जाते हो,
तो दिल को वहम सा हो जाता है,
कहीं खफा तो नही हो..?
कहीं उदास तो नही हो…?
तुम बोलते अच्छे लगते हो,
तुम लड़ते अच्छे लगते हो,
कभी शरारत से, कभी गुस्से से,
तुम हँसते अच्छे लगते हो,
सुनो…तुम यूँ चुप से ना रहा करो।
सुनो…तुम यूँ चुप से ना रहा करो।

Sachin Om Guptaसचिन ओम गुप्ता
चित्रकूटधाम

 (उत्तर प्रदेश)

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