कुछ और चाहिए- रोहिताश सिंह

कुछ और चाहिए- रोहिताश सिंह

हमे अपनी जरूरतों का ना मिटने वाला छोर चाहिए।
कुछ और चाहिए,कुछ और चाहिए।
देखे जहा भी जाये जहाँ भी,
हमे अपनी प्रसिद्धि का शोर चाहिए।
कुछ और चाहिए,कुछ और चाहिए,
कुछ मिले या ना मिले,
संपत्ति और धन लाने वाला चोर चाहिए।
कुछ और चाहिए,कुछ और चाहिए।
दुख नही जानना किसी , ना उसे मिटाना,
जो हमे हर्ष उल्लाष दे सके वे डोर चाहिए।
कुछ और चाहिए,कुछ और चाहिए।
नही रहना चाहते दुखों की बारिशो में
हमे सुख की बारिशो में नाचने वाले मोर चाहिए।
कुछ और चाहिए,कुछ और चाहिए।
कल्पना करते हैं उस संसार की,
जहा सिर्फ स्वार्थ हमारा हो।
हमे हमारे ही स्वार्थीपन की एक भोर चाहिए,
कुछ और चाहिए,कुछ और चाहिए।
कुछ और चाहिए,कुछ और चाहिए,

 

 रोहिताश सिंह 

अलवर, राजस्थान

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