खुशी का एहसास – अमित रजक

खुशी का एहसास – अमित रजक

जिंदगी से अब न कोई शिकायत सी है
गम,दर्द ,द्वेष,क्लेश की न कोई आहत सी है
तरस आता था कभी पालिश वाले पर
जनाब अब आने लगा है अपनी सोच पर
के उसे भी तो मेरी हालत पे तरस आया होगा
जद्दो जिल्लत से लड़ते हुए खुसी का एहसास छाया होगा
उसने जाना के कमाई का चलेगा हर सिक्का खोटा
और हमको सिखाया के नाम पे कोई काम न होता छोटा
उसको इस नज़रिये से देख जीवन एक चाहत सी है
जिंदगी से अब न कोई शिकायत सी है।

अमित रजक
जबलपुर, मध्य प्रदेश

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