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खुशी नाराज़ है – पूजा चौहान

खुशी नाराज़ है इतने दिन गुजर गए
तुमने मुझे महसूस नही किया l

हर पल चाहत तो करती हो मेरी पर ,
ग़म से नाता गहरा बना लिया क्या
आज उस खुशी मे सिमटे एहसास नाराज़ है |

आज वो खिलौना नाराज़ है जिससे बचपन मे खेला था मैने ,पर आज वो घर के कोने मे पड़ा धूल खा रहा है
खिलौनों मे छुपा बचपन नाराज़ है |

Drawe मे पडी पायल जिसे खरीदा था तुमने उस दूकान से पर पहना नही कभी गहनों से दुश्मनी हो गई क्या , घूग्रूओ की झंकार नाराज़ है |

मै चाँद दोस्त हुआ करता था तुम्हरा कई दिन गुज़र गए तुमने देखा नही मुझे उस चाँद की चाँदनी नाराज़ है |

मंदिर की सीढ़ियाँ तकती है रास्ता तुम्हरा भगवान से खफ़ा हो क्या श्रधा की आरती नाराज़ है |

अधूरे अफ़साने को पूरा नही किया यूँ ही छोड़ दिया किस्मत पर, वो अधुरी कहनी नाराज़ है

वो डायरी जिस पर लिखे बिना तुम्हारा दिन ना गुजरता था उसके खाली पन्ने नाराज़ है |

कुछ पुरानी तस्वीरे बेजान पड़ी है किसी को फुरसत नही की एक बार देख सके, जानदार लोगो को कैद किया है जिसने आज वो बेजान शीशे नाराज़ है |

वो चित्र जो बनाया था बड़े शौक से ध्यान नही दिया तो रंगो ने भी अपने रंग बदल दिया आज वो उदास चित्रकारी नाराज़ है |

—-पूजा चौहान

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Pooja Chauhan

Pooja Chauhan

मैं पूजा चौहान नई दिल्ली की निवासी हूँ। मैं श्रृंगार रस की कवित्री हूँ।

5 thoughts on “खुशी नाराज़ है – पूजा चौहान”

  1. 476256 616522Hey, you used to write amazing, but the last several posts have been kinda boring I miss your tremendous writings. Past couple of posts are just just a little bit out of track! come on! 850292

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