किसानो की हालत – पूजा पांडेय

किसानो की हालत – पूजा पांडेय

धरती सूखी होती है
आँखे रूखी होती है
पानी की चंद बूंदो के लिए,
अंखिया रूखी होती है
हांथो मै होते है बज्र ,
पैरो तले सूखी जमीन होती है
बारिश की चांदी समान बूंदो से,
अँखियो मै पूरी हुई कमी होती है
सादा जीवन व, न विचारो की कोई कमी होती है
जाने क्या बात होती है सारी दुनिया ,इनकी हरियाली से पूरी होती है
जाने क्या रिश्ता होता है इनकी पूरी दुनिया से ,
कि पूरी दुनिया इन्ही से पूरी होती है
हां किसानो की ऐसी ही जिंदगी होती है .

-पूजा पांडेय

Ravi Kumar

मैं रवि कुमार गुरुग्राम हरियाणा का निवासी हूँ | मैं श्रंगार रस का कवि हूँ | मैं साहित्य लाइव में संपादक के रूप में कार्य कर रहा हूँ |

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