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कितना बदल गया संसार -सुनील-दुबे

नये जमाने का सोच विचार।
बदल गया आचार विचार।।
धर्म हो गया अब व्यापार।
अंधा हो गया शिष्टाचार।।
सभ्य संस्कृति का लोप हुआ,
कितना बदल गया संसार।।

पश्चिमी सभ्यता लिया उधार।
भाई को बहन से हो गया प्यार।।
महंगा कपड़ा बदन उघार।
संस्कृति लुट गयी बीच बजार।।
फैशन है या मानसिक विकार।
कितना बदल गया संसार।।

पढा लिखा भी हुआ बेकार।
अंगूठा छाप है कारोबार।।
मंत्री बन गए पाॅकेटमार।
पीएचडी हैं लगे कतार।।
बिचौलियों की है भरमार।
कितना बदल गया संसार।।

भैया बैठे चूल्हा बार।
भाभी गई हैं हाट बजार।।
लाज शर्म का बंटाधार।
आदमी बन गया खर- पतवार।।
ऐसे युग को है धिक्कार।
कितना बदल गया संसार।।

✍ सुनील दुबे
जौनपुर (उ.प्र.)

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