कोमल हैं कमजोर नहीं तू, जीवन का आधार है तू

कोमल हैं कमजोर नहीं तू, जीवन का आधार है तू।
तूने ही तो प्यार से, घर संसार सजाया है।
अपने अरमानो को छोड़कर, अपना फ़राज़ निभाया है।
कभी सीता कभी राधा रूप में, इस धरती पर जनम लिया है।
अग्नि परीक्षा त्याग को सहकर, अपना कर्तव्य पूर्ण किया है।
नारी तू तो महान है, इस निराले जग से अनजान है।

कोमल हैं कमजोर नहीं तू, जीवन का आधार है तू।।
सती तुम ही सावित्री तुम ही, जीवन लिखने वाली कवित्री हो।
निष्ठा क्रम धर्म की मूरत ह तू, प्रेम की सच्ची सूरत है तू।
तुम प्रतीक हो अवतारी हो, वक्त पड़े तो झलकारी हो।
ऐसा को क्षैत्र नहीं जहां कदम मिला कर खड़ी ना हो।
गलत फहमी को दूर हटाओ, सशक्त हुई है नारियों।
अब अबला नहीं रही वो, हर क्षेत्र में झंडे गाड़ रही है वो।
कोमल हैं कमजोर नहीं तू, जीवन का आधार है तू।

pooja sawal

 

पूजा सचिन सावल
सावनेर, नागपुर

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