कोने में कंही बन्द पड़ी हिंदी -माहिया समीर

कोने में कंही बन्द पड़ी हिंदी -माहिया समीर

पुस्तकालय के बन्द कोने में कंही हिंदी रहती है ।
अपने ही लोगों के दिए थपेड़े दिन रात सहती है ।।

अपनी सँस्कृति को हम बहुत पीछे छोड़ आए हैं ।
तरक्की के नाम पर हिंदी से मुँह मोड़ आए हैं ।।

अब स्टेटस के नाम पर सब इंग्लिश बोलते हैं ।
और हिंदी बोलने वालों को हम कम तोलते हैं ।।

देखना सब एक दिन ऐसा भी आ जाएगा ।
चारों ओर इंग्लिश का वातावरण छा जाएगा ।।

उस समय हम पर इंग्लिश हँस रही होगी ।
अँधेरे कमरे के कोने में हिंदी धँस रही होगी ।।

 

Mahiya Samir

 

माहिया “समीर”

mahiyasameer

मैं माहिया समीर हिसार हरियाणा का निवासी हूँ। मैने B.Tech (Mech),M.Tech (Mech), MBA (Mrkt),Ph. D (p) पूर्ण की है। मेरी लेखन विधा : कविता,मुत्तुक, गजल, कहानी, लघुकथा है। मैं श्रृंगार रस और वीर रस का कवि हूँ। और मैं राजकीय बहुतकनीकी, हिसार मे प्रध्यापक के रूप में कार्य कर रहा हूँ।

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