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कठपुतली-कुमार राजकुमार

जीत जाओगे हर जंग तुम एक बार खुद को आज़माओ न।
जिंदगी कठपुतली है कान पकड़कर नचाओ न।।
वक़्त तो बदलता रैहता है परेशनियों से लड़ जाओ न।
मिला है किरदार तो हँसी ख़ुसी निभाओ न।।
डरते क्यों हो तुम ख़ुसी से सभी को गले लगाओ न।
शाम के बाद सहर देख लिया है तो कुछ फकीरों को खाना खिलाओ न।।
जीत जाओगे हर जंग तुम एक बार खुद को आज़माओ न।
जिंदगी कठपुतली है कान पकड़कर नचाओ न।।

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