कुछ पल ठहरा कुछ पल रुका था-कविता यादव

कुछ पल ठहरा कुछ पल रुका था-कविता यादव

कुछ पल ठहरा कुछ पल रुका था
ख़ामोशी में शायद वो थम सा गया था
कुछ पल …..
रोके अगर तो वो रुकना ना पाए
वो वक्त ही है जो बस चलता जाए ..
कुछ पल वो ठहरा कुछ पल रुका था..
ख़ामोशी में शायद वो थम सा गया था …
तन्हाई क्यु उसे काटी जाए
चूड़ी की खन-,खन क्यूँ उसको सताये
ये गम ही है जो उसको रुलाये
कुछ पल ठहरा ….
ख़ामोशी में ….
हम तो वही है पर उलझा सा क्यूँ है
जीवन की गाड़ी बस चल यू रही है
जीवन का शायद दस्तूर यही है
कुछ पल वो …..
ख़ामोशी में शायद …..

 

कविता यादव

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