क्या इतना आसान है? – Subham Lamba

क्या इतना आसान है? – Subham Lamba

क्या इतना आसान है तुम्हें भुला पाना?
क्योंकि तुम ना बिल्कुल मेरे बचपन जैसी हो,
ना मैं उसे भुला पाया हूं ,ना ही तुम्हें भुला पाऊंगा।

कैसे भुला दूं ? तुम्हारी हंसी की बेपरवाही को।
उन छोटी-छोटी बचकानी हरकतों की लापरवाही को।
क्या इतना आसान है उन्हें भुला पाना?
अगर है भी तो , मुझसे ना हो पाएगा।
ना मैं उन्हें भुला पाया हूं , ना ही तुम्हें भुला पाऊंगा।

एक बात पूछूं?
क्या तुम भुला पाओगी मेरे साथ बिताए उन लम्हों को
और मेरे उंगलियों के उस शपर्श को ,
जब मैं हरफ-दर-हरफ अपना नाम कुदेरता था।
कश्मीर के उस मखमल जैसी तुम्हारी नंगी पीठ पर,
और तुम तुरंत पहचान लेती थी।
क्या तुम सचमुच भुला दोगी?
मेरे रूह के उस एहसास को।
अगर हां ? तो सुन लो, मुझसे ना हो पाएगा।
ना मैं उसे भुला पाया हूं, ना ही तुम्हें भुला पाऊंगा।

सच कहूं तो,बहोत याद आता है।
मेरी छोटी सी डांट सुनकर तुम्हारा रूठना।
फिर धीरे से मेरी गोद में आकर, ज़िद करके मेरे हाथ से निवाला खाना।
और फिर अचानक से अपनी छोटी-छोटी उंगलियों से मेरे हाथ को जकड़ लेना।
और फिर बड़े प्यार से अपने होंठों से मेरे माथे को चूम लेना।
क्या तुम चाहती हो भुल जाना मेरे उस दुलार को,
अगर हां? तो सच कहूं , मुझसे ना हो पाएगा।
ना मैं उसे भुला पाया हूं, ना ही तुम्हें भुला पाऊंगा।

बड़ी मासूमियत से मेरी गर्दन में अपने कोमल हाथों को डालकर,
अपनी झील सी आंखें बंद करके निंद का बहाना करना।
मैं तो कदापि नहीं चाहता भुलना, तुम्हारी उन बदमाशियों को।
क्या तुम चाहती हो भुल जाना,उन जज़्बातों के उस मंजर को।
अगर हां? तो सच बता दूं तुम्हें, मुझसे ना हो पाएगा।
ना मैं उसे भुला पाया हूं, ना ही तुम्हें भुला पाऊंगा।
….$❤️…✍️

Subham LambaSubham Lamba
Bhiwani, Haryana

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comments
  • Subham lamba! U r grt! M use nhi bhul paung!

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