क्या है मन में- हरकेश चौधरी

क्या है मन में- हरकेश चौधरी

क्या है मन में है मन में क्या
किसंने और केसे यह जाना
बोला जो सुना वही
कहकर हो गये कही रवाना

क्या है संसार है क्या संसार
खुद से पुछा और तुमे से भी
जो है चित्वन चंचल बहार
मन का है सब यह नजराना

बगुले कि खामोशी देखो
उदान इसकी प्यासी है
वही करता हंस इंतेजार बुन्द का
रूठना उसका काफी है
रूठना उसका काफी है

मधुसुधन कि मुरली कि
राधा अब तो प्यासी है
राम कि सिता कही
वन् में उदासी है

आखो के ऊजाले में
दिखता है सब कुछ कही
पलक झपक सी ज़ाती है
क्या है मन में है मन में क्या
किसंने और केसे यह जाना
बोला जो सुना वही
कहकर हो गये कही रवाना

 

  हरकेश चौधरी

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