क्या पता है, तुझे – चेतन वर्मा

क्या पता है, तुझे – चेतन वर्मा

क्या पता है, तूझे
धड़कन बनकर
आती है तू
धक धक करती है
और मंद-मंद
मुस्कुराती है तू
क्या वजूद मेरा छुपा रखा है
या राज लबों पर
लाती है तू
खूबसूरत पलकों के साए में
क्या गीत जिंदगी के
गाती है तू
बेखबर झूमकर चलने वाली
क्या दिलकश अदा
दिखाती है तू
मेरे होठों की हंसी बरसाने वाली
क्या सोलह सिंगार की लाज
बताती है तू

chetan vermaचेतन वर्मा
(बूंदी) राजस्थान

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