क्या यही इश्क़ है? – शुभम् लांबा

क्या यही इश्क़ है? – शुभम् लांबा

बेहद, बेवजह, बेवक्त और बेमिसाल
जो भी है, सिर्फ तुमसे है।
क्या यही इश्क़ है?
तेरे लफ्जों की तर्रनूम को सुनने के लिए।
तेरे चेहरे में नूरमहल के दिदार के लिए।
तेरे जज़्बातो का मेरे प्रति निसार के लिए।
बेधड़क धड़कता है ये दिल।
क्या यही इश्क़ है?

तेरी नन्ही-सी कलायियों के मात्र छुने से।
तेरी चाहत से भरी रूहानी शररातों से।
तेरे होंठों पर मेरे नाम के अल्फाज़ से।
बेधड़क धड़कता है ये दिल।
क्या यही इश्क़ है?

मेरे चेहरे पर तेरी घनी जुल्फों की छांव से।
मेरे माथे पर तेरे गुलाबी होंठों के उस शुरुवाती चूमन से।
मेरे इन्द्रियों पर तेरे जिस्म की खुशबू के उस एहसास से।
बेधड़क धड़कता है ये दिल।
क्या यही इश्क़ है?

अचानक से मेरे शरीर से तेरे बदन के लिपटने से।
उसी आगोश की हवा में तेरी आंखों में डुब जाने से।
दो जिस्मों के रूहानी मिलन के मात्र श्मरिन से।
बेधड़क धड़कता है ये दिल।
क्या यही इश्क़ है?

बीत गए उन लम्हों की खुशबू की महक से।
तेरे साथ न होने पर,मेरी आत्मा की बेबसी और बैचेनी से।
फिर तेरे चेहरे पर, उन सामाजिक मजबूरियों के तनाव से।
बेधड़क धड़कता है ये दिल।
क्या यही इश्क़ है?
…..$❤️…..✍️

शुभम् लांबा

भिवानी, हरियाणा

0

Leave a Reply

Create Account



Log In Your Account