क्यों दुखी हो किसी के कहने मात्र से-दिव्यानि पाठक

क्यों दुखी हो किसी के कहने मात्र से-दिव्यानि पाठक

खोया सुख लौटता नही ,
किसी के कहने मात्र से।
आई विपत्ति टलती नही,
किसी के कहने मात्र से।
समय बदलता नही,
किसी के कहने मात्र से।
सुबह शाम होती नही,
किसी के कहने मात्र से।
तो क्यु व्यथित हो आप,
किसी के कहने मात्र से

Divyani Pathakदिव्यानि पाठक
सेहोर, माधियप्रदेश

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