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लिखती रहती हूं मै-माला-चौधरी

तेरे दिए दर्द में दिन रात पीसती रहती हूं मैं
😢
तेरे पत्थर दिल पे अपनी मुहब्बत का चंदन घिसती रहती हूं मै
😢
होकर लाचार बहती रहती हैं मेरी आंखे
😢
पल पल सिसकती रहती हूं मै
😢
बह के आंसुओ में मेरी काजल की स्याही
😢
मेरी कलम में उतरती रहती है जब तक
😢
तब तक पगलाई सी लिखती रहती हूं मै
😢

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