लोरी-जितेंद्र शिवहरे

लोरी-जितेंद्र शिवहरे

आँखों में सपने लेकर के सोजा
सोजा नन्हे मुन्ने सोजा।

दिनभर तू जागा है आंखों को खोले
भागा है आंगन में तुतला के बोले
फूलों की सेज बुलाती है तो जा
सोजा नन्हे मुन्ने सोजा।

आँखों में सपने लेकर के सोजा

देरी से गुजरी है ये भर दोपहरी
आँखों की पलकों पे है नींद गहरी
चांद सितारों की दुनिया में खोजा
सोजा नन्हें मुन्ने सोजा।

परियों की रानी से शादी रचा दूं
गुड्डे की गुडिया की डोली संजा दूं
रानी के दिल का राजा तू होजा
सोजा नन्हें मुन्ने सोजा।

खेल खिलोनों से से ये घर संजा है
रेल की छुक छुक में अपना मजा है
पापा जी लायेंगे नये जूता मौजा
सोजा नन्हे मुन्ने सोजा।

टी वी रेडियो मंद करो रे
सोता है मुन्ना मुंह बंद करो रे
नींद की बाधाओं को धोजा
सोजा नन्हे मुन्ने सोजा ।

 

      जितेंद्र शिवहरे

  चोरल, महू, इन्दौर 

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