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“लौट आओ परदेश के वासी गांव तुम्हें पुकारे”-प्रिया-चतुर्वेदी

“धरती दुल्हन बनी है देखो,
ओढे चूनर धानी”
“लहराकर अंबर से बोले,
तुम बरसाओ पानी”
“खेतों की मिट्टी की खुशबू,
महकाए चौबारे”
“लौट आओ परदेश के वासी,
गांव तुम्हें पुकारे”

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