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माँ-अंशिका-उपाध्याय

घुटनों पर रेंगते रेंगते,
कब पैरों पर खड़ा हुआ।
तेरी ममता की छाव में,
जाने कब बड़ा हुआ।।
काला टीका दूध मलाई,
आज भी सब कुछ वैसा है।
एक मैं ही मैं हु हर जगह,
माँ प्यार ये तेरा कैसा है?
कितना भी हो जाऊ बड़ा,
माँ! आज भी तेरा बच्चा हु।
माँ! आज भी तेरा बच्चा हु।

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