माँ बेटा जीवन-माधव कुमार सादा

माँ बेटा जीवन-माधव कुमार सादा

चलते-चलते आदमी क्या कर लेता है।
जीवन की अनमोल धन खो देता है ।।
भूल गए उस मात-पिता को जिसने पाला है।
प्रेमी तो प्रेमी है प्रेमी की मां बुलाया है।।
भाई हो या बहन सब को छुराया है।
समाज का क्या कहना उसने दोष लगाया है।
हरेक घर की एक कहानी मां ने दोष लगाया है ।
बेटे को हम कुछ धर्म कमा कर लाया है।।
बहू की सेवा अब तो फैशन हो गया है।
क्या कहूं अपना ही खून जहर हो गया है।।
कभी हमने सपना देखी थी।
पुत्र को सरवन बहू सीता जैसी आॅकि थी।।
मरना चाहती हूं मगर क्या करूं भगवान से डरती हूं।
भेजा था जप करने पुत्र बहू की सेवा करती हूं।।
अभी से भूखी रहने का अभ्यास करती हूं।
क्या कहूं बुढी होने का प्रयास करती हूं।।
काम नहीं किया जाता सोने के लिए जाती हूं।
बहू की डांट सुन सारी रात रोती रह जाती हूं।।

 

  माधव कुमार सादा

लौकही ,धनछीहा, बिहार

0

Leave a Reply

Create Account



Log In Your Account