मॉ की लाडली – पूजा महतो

मॉ की लाडली – पूजा महतो

मैं लाडली हुँ|
मॉ की लाडली हुँ|
दुनिया की हर परछाई से
मॉ की आँचल मैं रही हुँ|
रातभर जागकर मुझे सुलाई हैं|
अपने भूखे रहकर मुझे खिलाई हैं|
कभी रोने की एहसास नही होने दिया|
हर मुसीबत से मुझे बचाई हैं|
बडे हो जाने पर बेटी तु पराई हैं|
तु जिस घर जाओ
उस घर को मदिंर वना दो|
कभी यह मत कहना
मॉ तेरी जेसी यहॉ
मुझे ममता नही मिलता
बेटी हो बेटी बन कर रहना|
मॉ की यह बादा बचपन से सुन-सुनकर रही हुँ
मॉ कभी यह न कहती बेटी तु मेरी गोद में पली बढ़ी हो|
किया बेटी की यही पहचान हैं कि
मॉ को मुसीबत में देखकर बह चुप-चाप सहती रहे|
कभी मॉ अपनी बेटी की मन की बात नही जान पाती हैं
बस जन्म लेती ही पराई हो जाती हैं|

पूजा महतो
समस्तीपुर बिहार

Ravi Kumar

मैं रवि कुमार गुरुग्राम हरियाणा का निवासी हूँ | मैं श्रंगार रस का कवि हूँ | मैं साहित्य लाइव में संपादक के रूप में कार्य कर रहा हूँ |

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