माँ की याद-सूरज कुमार

माँ की याद-सूरज कुमार

कभी -कभी थक जाता रास्तो में चलते-चलते,
तो झट से गोद में उठा लेती थी माँ
मेरे को तो आराम देती थी,
लेकिन खुद तकलीफ सहती थी माँ
दिन भर घर का काम वह करते रहती थी,
फिर भी रात में मेरे पैरो में तेल लगाना नही भूलती थी माँ
दिन भर की थकावट के बाद भी रात में मधुर लोड़ी सुनाती थी माँ
अगर कभी कुछ गलती हो जाती तो गुस्सा तो करती थी,
लेकिन बाद में प्यार से समझती थी माँ
अगर कभी तबियत खराब हो जाता था
तो पूरी रात नही सोया करती थी माँ
लेकिन जैसे-जैसे बड़ा होता गया
और माँ से दूर होता गया।
अब थाक जाता हूँ जिंदगी की सफर में चलते-चलते तो कोई नही सहारा देने वाला माँ
कितना भी आराम पाने के लिए कोशिश कर लू
लेकिन तेरी गोद जैसा आराम कही नही मिलता माँ

 

 

         सूरज कुमार

      दानापुर,पटना

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