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माँ को मुस्कुराते देखा हैं-मयारू मुलुक मयारू गढ़वाल

करती हैँ हर रोज मेहनत दिल से,
ना चेहरे पे उदासी को देखा हैँ |
गम हो चाहे लाखों दिल में,
फिर भी माँ को मुस्कुराहाते देखा हैं ||

खिलाती हैँ मेरे को दूध-रोटी माँ मेरी,
पर उनको सूखी रोटी खाते देखा हैँ|
ना रहा हो राशन भले घर में मेरे,
चाहे मांग कर किसी से लायी हो
पर मेरे लिए माँ को मैंने खाना बनाते देखा हैँ ||

दुःख हो ज़िंदगी में भले मेरे हज़ारों,
पर माँ को मैंने साथ खड़े देखा हैं |
आता हूँ जब कभी थक हार कर मैं,
मैंने माँ के मन मैं आते सवालों को,
उनकी नम आँखों में देखा है ||

बिता हो जीवन संघर्ष में भले माँ का मेरा,
पर अब ऐसा ना होने दूंगा मैं|
करता हूँ वादा माँ से आज मैं,
कर दूंगा समर्पित सारी जिंदगी अपनी कदमों में तेरी,
पर आँखों से आँसु की एक बूँद नहीं निकलने दूंगा मैं,
आँखों से आंसू की एक बूँद नहीं निकलने नहीं दूंगा मैं ||

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