मन पंछी-राकेश कुमार

मन पंछी-राकेश कुमार

मन पंछी उड़ चल गगन की ओर,
घोरअँधेरा छाया, जब ह तू घबराया,
मन पंछी,,,,,,,,
थी अभिलाषा कुछ करने की,आगे आगे बढ़ने की,
सबसे ऊपर आना, जग को ये बतलाना,,,,
उड़ चल गगन की ओर
मन पंछी उड़ चल गगन की ओर
बचपन से सिखाया, माँ-बाप ने भी पढ़ाया
न रहना तुम पीछे, उड़ चल गगन की ओर
मन पंछी उड़ चल गगन की ओर,,,

 

    Rakesh Kumar Mastanaराकेश कुमार

मुथरा,उत्तर परदेश

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