Notification

मै अब खुद से भी इश्क़ करना चाहता हूँ-देवेंद्र अवस्थी

फ़रेब के सम्बन्ध सारे दिल से मुटाना चाहता हूँ
इश्क़ की इस परवानगी से बाहर आना चाहता हूँ
तन्हायी को छोड़कर मैं उपर उठना चाहता हूँ
इंतज़ार के किस्से सारे खत्म करना चाहता हूँ
यार मैं अब खुद से भी इश्क़ करना चाहता हूँ….

दिल में अब हसरत न है कुछ पाने या खोने की
बस अब कभी ना हो जरूरत रूठने या मनाने की
हम सभी के दिल में हो सब हमारे दिल मे रहे
दिल की इस हसरत को मैं पूरा करना चाहता हूँ
यार मै अब खुद से भी इश्क़ करना चाहता हूँ….

है न कोई अब पास मेरे जो मुझे दिलाशा दे सके
चूम कर माथा मेरा वो मुझको आशा दे सके
हो न कोई नेमुल-बदल दिल में परस्पर प्रेम हो
उस प्रेम के एहसास से मै रुख़सत होना चाहता हूँ
यार मैं अब खुद से भी इश्क़ करना चाहता हूँ….

हादसो की ज़द न हो रिश्ते में साजिश न हो
दिल में समर्पण भाव हो और अटल विश्वास हो
सुख में हों या दुख में हों हर लम्हा उसके साथ हो
प्रेम के उस आनंद का आभास करना चाहता हूँ
यार मै अब खुद से भी इश्क़ करना चाहता हूँ….!!

Leave a Comment

Connect with



Join Us on WhatsApp