माई तू मेरा संसार

माई तू मेरा संसार

माई तू मेरा संसार,

मेरे आयुष्य का आधार;

न्योछावर किया मुझपर दुलार,

चुका न पाऊँ तेरा यह उधार।

 

बड़े नाज़ो से पोषित किया मुझको,

कितनी वेदना सहनी पड़ी तुझको;

कर न सकूँ तेरे त्याग का उद्गार,

चुका न पाऊँ तेरा यह उधार।

 

दुग्ध-सूरत में लहु पिलाया तूने,

महत्ता तेरी ईश्वर भी सुने;

तेरे हट-समक्ष यम बैठे हार,

मेरे खातिर छेड़ा विधाता से तक्रार,

चुका न पाऊँ तेरा यह उधार।

 

था मिट्टी-सा निराकार,

नवाजा तूने उचित आकार;

सत्कर्म होंगे किसी जन्म के,

जो मिला मुझे है तेरा प्यार;

चुका न पाऊँ तेरा यह उधार।

 

प्रतिमा है ममता की तू,

मुझपर खुदा का है उपकार;

‘अगले जनम मोहे तू ही मिलेयो’,

आस करूँ यही बार-बार।

सचिन अ. पाण्डेय

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