मना करेगी हर औरत-पूनम शर्मा

मना करेगी हर औरत-पूनम शर्मा

कैसा होगा वो दिन, जब मैं दुनिया में आऊंगी।
मुझको सब प्यार करेंगें, लाडली मैं बन जाऊंगी।
नन्ही-नन्ही उंगली पकड़कर, मुझको चलना सिखलाएंगें।
गलत सही क्या होता है, यह भेद मुझे बतलाएंगें।
घर पर तो चंचल तितली सी, मैं घूमा करती हूं।
पर क्या इतनी निश्चलता से, बाहर मैं रह पाऊंगी।
बाज़ की तरह नज़रें गाड़े, कुछ लोग मुझे निहारेंगें।
पास बुलाकर बड़े प्यार से पहले वो पुचकारेगें।
डरी डरी सहमी सहमी सी,पास मैं उनके जाऊंगी।
उनके मन की कटुता को कैसे समझ मैं पाऊंगी।
लालच कभी खिलौनों का तो, कभी मिठाई देंगे।
मेरी नासमझी का वो खूब फायदे लेंगें।
मेरी चीख चिल्लाहट का असर न उन पर होगा।
दर्द से तड़प तड़प कर मेरा जीवन खत्म ही होगा।
फिर अखबारों की सुर्खियों में मेरा नाम आऐंगा।
जैसे पहली बार हुआ हो ऐसा हल्ला छाऐंगा।
अगले ही पल फिर कोई बेटी शिकार बनेगी।
ऐसी अमानवीय घटनाऐं, ना जाने कब थमेगी।
डर लगता है अब तो मुझको इस दुनिया मैं आने से।
यही रहा तो फिर इक दिन ऐसा भी आऐगा,
मना करेगी हर औरत मर्द को धरती पर लाने से।

पूनम शर्मा
चंद्रावल, दिल्ली

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