मैंने देखा था एक सुन्दर सपना-वशिष्ठ प्रसाद

मैंने देखा था एक सुन्दर सपना-वशिष्ठ प्रसाद

मैंने देखा था एक सुन्दर सपना ।
स्वर्ग सा सुन्दर घर था अपना ।
छोटी छोटी नदियां बहती उस में
प्यार छिपा था अपना।।

कल कल बहती गीत सुनाती
मीठे मीठे स्वर में अपना।
बुल बुल चहके फूल खिले
हरियाली कि क्या बात है कहना।

निति प्रातः की लाली छाई
चंचल पंछी शोर मचाई
कोयल प्यारी कुक सुनाती
मीठे मीठे स्वर अपना।।

सुन्दर गाँव की वादियों में
छिपा हुआ रहता अपना।
वरगद पिपल के छांव में
बिता हुआ बचपन अपना।

सभी से सबको प्रेम था ईतना।
सब के दिल में उत्साह भरा था
होठों पर मुस्कान था ईतना।
मैंने देखा था एक सुन्दर सपना।।

 

    वशिष्ठ प्रसाद
     बलिया,यूपी

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