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मसले उलझ गयें मेरे बेबाक अन्दाज से – नेहा श्रीवास्तव

मैने रिश्तों का भ्रम पाल रखा था,

अपने चारों तरफ उलझनो का जाल रखा था।

मसले उलझ गये मेरी बेबाक अन्दाज से,

इस हालात मे भी खुद को संभाल रखा था।

दुनिया के खुलूसों का खौफ था मुझे,

अपने चारो तरफ दीवार लगा रखा था।

हर किसी से मिलकर भी हम अजनबी रहे,

खुद से खुद का दिल बहला रखा था।

हम भी गुनहगार अपने घर मे हो गये,

किसी अपने ने इल्जाम लगा रखा था।

तुम्हारे यादों के अब राख ही बचा पायें हैं,

तुम्हारे खतों को किसी ने जला रखा था।

Neha srivastavनेहा श्रीवास्तव

उत्तर प्रदेश(बलिया)

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Neha Srivastava

Neha Srivastava

मैं नेहा श्रीवास्तव बलिया उत्तरप्रदेश की निवासी हूँ। मैं श्रृंगार रस की कवित्री हूँ। मैंने B.ED Science में शैक्षणिक योग्यता प्राप्त की है। मैंने साहित्य लाइव रंगमंच 2018 (राष्ट्रीय स्तर पर हिंदी प्रतियोगिता) में द्वितीय स्थान प्राप्त किया है।

9 thoughts on “मसले उलझ गयें मेरे बेबाक अन्दाज से – नेहा श्रीवास्तव”

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