मेरा दर्द- सपना सिंह

मेरा दर्द- सपना सिंह

एक दिन चलते चलते रास्ते में ठोकर लगी,
हाथ फैलाई की कोई मझे थाम ले चलते तो व्हा बहुत लोग थे।
लेकिन किसी ने नी थमा मझे गिरी तो चोट लगी,
गहरी लेकिन कुछ समझ ना आया बैठी रही कुछ देर तक ये सोच की कोई ना ,
अपना है जिसे कह अपना आशु बहा सकु त्वी कोई हाथ मेरी तरफ बढ़ मझे उठाया।
और खुद के सीने से लगा मझे लगाया।
मै बहुत रोई अपना दिल का हर दर्द कह सुनाया चोट तो बहुत लगी,
लेकिन बहुत छुपाया फिर तवी आंख खुला और ओ कोई और नहीं मेरे दर्द ही मेरे काम आया।
तब समझी की इस दुनिया मै सब ख़ुद ही मै ब्यस्त है अपना तो खुद की तन्हाई है।

 

         सपना सिंह
      बोरिंग , पटना 

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