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मेरा घर मेरा गांव – अविनाश सिंह

माँ की फटकार हैं,तो पिता का पुचकार है,
भाई का दुलार है, तो बहन का प्यार है।

यही मेरा घर है, यही मेरा संसार है,
माँ की ममता है, मेरे रक्त का यही संचार है।

मेरा घर ही मेरी दुनिया है ,यही मेरा प्यार है,
बसता है दिल मेरा ,इस गांव की धरती पर।

मिलती है खुशबू इधर मेरे खेत की माटी में,
सबसे न्यारा है सबसे प्यार है मेरा गांव ही मेरा संसार है।।

Avinash Singhअविनाश सिंह
गोरखपुर, उतर प्रदेश

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Avinash Singh

Avinash Singh

मैं अविनाश सिंह गोरखपुर हरियाणा का निवासी हूँ। मैं श्रृंगार रस का कवि हूँ।

2 thoughts on “मेरा घर मेरा गांव – अविनाश सिंह”

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