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मेरा पहला प्यार – रवि कुमार

लो कह दिया हमने की तुम ही हो मेरा प्यार,
जब मिली तुम मुझको पहली बार,
करना चाहते थे हम तुमसे ये इकरार,
कि तुम ही हो मेरा प्यार ।
तुम ही हो मेरा प्यार ।।

याद है हमे साथ गुजारे वो चार दिन,
ना हम बोल पाये,
ना तुम कुछ कह पाये शर्माए बिन,
कहना चाहते थे हम तुमसे बहुत कुछ,
पर कुछ हो गयी हममे ऐसी तकरार ,
कि कह नही पाये कि हमे था तुमसे कितना प्यार।।

ना हो तुम Facebook पर,
ना ही Instagram पर,
What’s app भी तो तुम नही चलाती,
जो तुम तक मेरी ये बात पहुच पाती,
कैसे पहुचाये तुम्तक अब अपने ये जज्बात,
खत लिखे तो पड़ सकती है मुझको मार,
लो कह दिया फिर भी की तुम ही हो मेरा प्यार।।
तुम ही हो मेरा प्यार।।

कहने को य मॉडर्न जमाना है,
लेकिन फिर भी समाज का जो ये ताना है,
करके मुझे उसको पार,
पहुचानी है तुम्तक अपनी ये बात,
कि तुम ही हो मेरा प्यार ।।
तुम ही हो मेरा प्यार।।

लिख दी हम्ने कुछ लव्जो मे दिल की ये बात,
क्या पता कैसे पहुंच जाये तुम्त्क ये आवाज,
बस कर लो अब तुम मेरा इतना ऐतबार,
कि तुम ही हो मेरा प्यार।।
तुम ही हो मेरा प्यार।।

रवि कुमार
गुरुग्राम 
हरियाणा

 

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Ravi Kumar

Ravi Kumar

मैं रवि कुमार गुरुग्राम हरियाणा का निवासी हूँ | मैं श्रंगार रस का कवि हूँ | मैं साहित्य लाइव में संपादक के रूप में कार्य कर रहा हूँ |

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