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मेरा शहर-अरुण आजाद

मेरा शहर है ये
बड़ी बारीकी से जानता हू
सड़को बागानो से लेकर
गली के दिलो तक छानता हू
ये ढलता सूरज
उगता चांद
अपनो की खातिर
स्वयं से समय की मांग
थोड़ा धीरे चलता हू मै
हा! ये मानता हू
मेरा शहर है ये
बड़ी करीब से जानता हू ।
कई उलझने
कई कशमकश
कही बेवजह बढ़ी भीड़
कही बेवजह की अट्ठाहस
मुशकिलो की दौर मे
मुस्कुराते इनसानो को जानता हू ।
मेरा शहर है ये
बड़ी करीब से जानता हू ।।
कभी ईद कभी दिवाली
दोस्त मिले तो चौराहो पर मनाली
बन्नो की शादी में
मोहल्ले भर का काम
कही बारिश हो गयी
तो अफज़ल के घर मे इंतज़ाम
मज़हबो से आगे बढ़ चला शहर
जिसे मै स्वर्ग मानता हू
मेरा शहर है ये
बड़ी करीब से जानता हू ।

 

 

           Arun Azad

   अरुण आजाद

 बाहरेच , उत्तर,प्रदेश

 

 

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