मेरे पापा-भूमि शाह

मेरे पापा-भूमि शाह

जब मैं पैदा हुइ और सबसे पहले जिसने गोद मैं लिया और प्यार से मेरी ऊँगली पकड़ी वो मेरे पापा थे…
जब छोटी थी और चलना सिख रही थी तभी गिर के उठाने वाले वो मेरे पापा थे …..
जब बचपन मैं कुछ चाइए था तब मम्मी मना कर देती थी लेकिन कभी ना नहीं बोलने वाले वो मेरे पापा थे…..
जब मेरी ख्वाशिओं की बात आयी तो खुद की ख्वाशिओं का गला घूँट कर मेरी ख्वाशिए पुरी की वो मेरे पापा थे….
जब मुश्किल वक़्त मैं सब लोगो ने मुझ पर से अपना विशवास उठा लिया तब एक ही इन्सान मेरे साथ खड़ा था वो थे मेरे पापा….
जब घर छोड़ के ससुराल जाने का वक़्त आया तभी मेरे लिए सबसे ज्यादा रोने वाले वो मेरे पापा थे….
जब घर परिवार की भाग दौड़ मैं अपनी परवाह करना भुल गई थी तब अपनी बेटी की परवाह करने वाले वो मेरे पापा थे…..
पुरी ज़िंदगी जिसने बिना कुछ कहे बिना किसी स्वार्थ के रिश्ता निभाया वो मेरे पापा थे..
अब बारी है मेरी उनकी लाठी बनना , उनका सहारा बनना….
ताकि वो गर्व से कहे मेरी बेटी मेरा अभिमान

 

भूमि शाह

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