मेरी मां – चेतन वर्मा

मेरी मां – चेतन वर्मा

मां तो मां होती है जैसी भी होती है
मां तो मां होती है

अपनी ममतामई माटी की सजी होती है
आसमान जैसे दिल की राशि होती है
दुख देखकर पली-बढ़ी होती है
जैसे भी होती है मां तो मां होती है

सब दुखों को हर कर बड़ी होती है
अपने ही आंगन में खुश होती है
थोड़ी बड़ी होती है तो अपनों से पराई होती है
अपनों को छोड़ कर दूसरों के घर की होती है
जैसे भी होती है मां तो मां होती है

पग पग पर संघर्ष करके खड़ी होती है
घर आंगन की चिंता में खुद पागल होती है
बच्चों के दिल में प्यार भरने में माहिर होती है
आच ना आए अपने परिवार पर इसलिए सबसे आगे होती है
जैसे भी होती है मां तो आखिर मां होती है

chetan vermaचेतन वर्मा
( बूंदी ) राजस्थान

Ravi Kumar

मैं रवि कुमार गुरुग्राम हरियाणा का निवासी हूँ | मैं श्रंगार रस का कवि हूँ | मैं साहित्य लाइव में संपादक के रूप में कार्य कर रहा हूँ |

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