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मिलती हुँ – नेहा श्रीवास्तव

हर किसी से मुस्कुराकर मिलती हुँ,
मत पूछिये कितने दर्द छुपाकर मिलती हुँ.
कोई पढ ना ले मुझे मेरी नजरो से,
हर शख्स से नजरे चुराकर मिलती हुँ.

नेहा श्रीवास्तव
उत्तर प्रदेश (बलिया)

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Ravi Kumar

Ravi Kumar

मैं रवि कुमार गुरुग्राम हरियाणा का निवासी हूँ | मैं श्रंगार रस का कवि हूँ | मैं साहित्य लाइव में संपादक के रूप में कार्य कर रहा हूँ |

1 thought on “मिलती हुँ – नेहा श्रीवास्तव”

  1. 718739 828264Hey this is kinda of off topic but I was wanting to know if blogs use WYSIWYG editors or in case you need to manually code with HTML. Im starting a weblog soon but have no coding experience so I wanted to get advice from someone with experience. Any support would be greatly appreciated! 3087

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