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मिथिला महान-बलराम सिंह

कहूं भाई ओ कोन धाम,जे छै धामौ के ओ धाम
हमर ओ मिथिला महान,हमर ओ मिथिला महान।

जहां कमला कोसी और बलान,जहां उबजैत मौध, पान, और माखन
जहां कोयली बाजाई मीठी तान,जहां सुगना पढ़ाई वेद पुराण।

हमर ओ मिथिला महान,हमर ओ मिथिला महान।

जहां सीता के छै जन्म स्थान,जहां पाहुन् बनला हन श्री राम
जहां विद्यापति के अच्छी धाम,जहां चाकर उगना बनल भगवान।

हमर ओ मिथिला महान, हमर ओ मिथिला महान।

जहां धोती कुर्ता पाग अच्छी शान,जहां नारी के अच्छी बर सम्मान
जहां मैथिली बोली सबहक जान,जहां सत्य धर्म में बसैत प्राण।

हमर ओ मिथिला महान,हमर ओ मिथिला महान।

बलराम सिंह की अपनी कलम से

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