मिट्टी का दो दिल – मुनमुन सिंह

मिट्टी का दो दिल – मुनमुन सिंह

यार इस दुनिया में है मिट्टी का दो दिल
आज तक कोई समझा नहीं इसे
आज तक कोई जाना नहीं इसे।
यह है किसका दिल।
यह है कैसा दिल,
यार इस दुनिया में है मिट्टी का दो दिल
इसे पका दो तो बन जाता है कठोर।
हथौड़े से जाता है ये टूट
इसी तरह मानव दिल भी भर जाता है क्रोध से अटूट।
सबसे जाता है टूट।
सबसे जाता है रूठ।
यार इस दुनिया में है मिट्टी का दो दिल
गिला कर दो इसे तो बन जाता है नम
हथौड़े की पड जाती है छाप
इसी तरह मानव दिल भी बन जाता है कोमल
सबसे है जुडता।
सबसे है मिलता।
यार इस दुनिया में है मिट्टी का दो दिल

मुनमुन सिंह

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