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मोह ही प्यार-राखी शरण

हर आवाज ही बुलन्द हो ,
यह जरूरी नहीं होता,
हर चाल मदमस्त हो,
यह जरूरी नहीं होता,
हर इंसान ही ईमानदार हो ,
यह जरूरी नहीं होता,
हर नयन ही वाचाल हो
यह जरूरी नहीं होता,
हर अभिनय ही दमदार हो,
यह जरूरी नहीं होता,
हर फूल में ही कांटों की उपस्थिति हो,
यह जरूरी नहीं होता,
हर राह ही मंजिल हो
यह जरूरी नहीं होता,
हर मोह ही प्यार हो ,
यह जरूरी नहीं होता।

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