वो मुझको अपना कहने लगे हैं – विश्वम्भर व्यग्र

वो मुझको अपना कहने लगे हैं – विश्वम्भर व्यग्र

वो मुझको अपना कहने लगे हैं
रुके दरिया फिरसे बहने लगे हैं
तोड़ दी हैं सारी हदें उसने देखो
वो अब मेरे दिल में रहने लगे है
राह कठिन प्रेम की जानते नहीं,
कठिनाई फिर भी वो सहने लगे
रास आगया बंधन लगता उसको
हथकड़ी भी अब तो गहने लगे है
देखकर प्यार व्यग्र हमारा तुम्हारा
दुनिया वाले तब से दहने लगे हैं

vishwambhar vyagra

विश्वम्भर व्यग्र,
राजस्थान

Vishwambhar Vyagra

मैं विश्वम्बर व्यग्र गंगापुर राजस्थान का निवासी हूँ। मैं श्रृंगार रस का कवि हूँ।

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comments
  • अनिल वर्मा

    April 12, 2018 at 7:31 am

    शानदार sir g

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