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मुक्तक – अशोक सिंह

लवों पर सुर्ख नर्मी है, दिलो में प्यार है इतना
तुम्हारे दिल मे मेरा दिल, मुझे एतबार है इतना ।
कहीं ये बात अपनी, बीच में ना बिगड़ जाए
मेरे यारा तेरे इन्कार में, इजहार है इतना ।।

अशोक सिंह
आजमगढ़ उत्तरप्रदेश

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Ravi Kumar

Ravi Kumar

मैं रवि कुमार गुरुग्राम हरियाणा का निवासी हूँ | मैं श्रंगार रस का कवि हूँ | मैं साहित्य लाइव में संपादक के रूप में कार्य कर रहा हूँ |

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