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मुसाफिर-माला-चौधरी

कहता है मुसाफिर
💔
सोचा था घर बना कर सुकून से बैठेंगे ,
💔
लेकिन घर की जरूरतों ने मुसाफिर बना दिया
💔
सोचा था बड़ा सुख चैन होगा मुहब्बत की राहों में
💔
लेकिन उसकी पथरीली सड़कों ने मुझे जिंदगी की हकीकत से जाहिर बना दिया
💔
सोचा था उसकी रंगत मेरे होठों पे मुस्कुराएगी
💔
लेकिन उसकी संगत ने मेरी आंखो को बारिशें दी 😢
💔
और उस दर्द की लपटों ने मुझे शायर बना दिया
💔
सुनो 👂
💔
क्या कहता है मुसाफिर
💔
सोचा था घर बना कर सुकून से रहूंगा
💔
लेकिन घर की जरूरतों ने मुसाफिर बना दिया
💔

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