ना कहने की हिम्मत रखती हूं-पूनम शर्मा

ना कहने की हिम्मत रखती हूं-पूनम शर्मा

लड़की हूं पर बुलंद हौंसलें हैं मेरे,
जो मुझे स्वीकार नहीं,
उसे ना कहने की हिम्मत रखती हूं।
हां! सच कहने की हिम्मत रखती हूं।
मैं नहीं खिलौना कि चाबी से चल जाऊंगी,
किसी और की मर्ज़ी पर उसका मन बहलाऊंगी।
ख्वाब मेरे भी हैं कई,
उन्हें पूरा करने का जज़्बा रखती हूं।
जो मुझे स्वीकार नहीं,
उसे ना कहने की हिम्मत रखती हूं।
मुझे छेड़ने वाले, नियत में तेरी खोट भरी,
मेरी चुप्पी को उसने माना था, मेरी कमज़ोरी।
लेकिन उसको समझाने की सहनशीलता रखती हूं।
जो मुझे स्वीकार नहीं,
उसे ना कहने की हिम्मत रखती हूं।
कायरता तो उसने की,
जो ना को मेरी सह नहीं पाया,
मुझे डराने के लिए तेज़ाब उठा कर ले आया,
फिर भी क्या ऐसा करके फैसला मेरा बदल पाया?
मैं इतनी कमज़ोर नहीं, अडिग इरादे रखती हूं।
जो मुझे स्वीकार नहीं,
उसे ना कहने की हिम्मत रखती हूं।
हां! मैं भी चीखी थी, रोई थी,
देखकर जले हुए चेहरे को अपने,
फिर सोचा मेरी हार ही तो जीत है उसकी,
जली हूं पर, जले नही है मेरे सपने,
अपनी हार को जीत में बदलने का दम रखती हूं।
जो मुझे स्वीकार नहीं,
उसे ना कहने की हिम्मत रखती हूं।
चेहरा ही तो जला है मेरा,
हौंसला मेरा मरा नहीं,
बढ़ना है मुझको मेरे लक्ष्य पर,
साथ मेरे कोई हो या नहीं,
अपने दर्द साथ मैं मंज़िल पाने की ज़िद रखती हूं।
जो मुझे स्वीकार नहीं,
उसे ना कहने की हिम्मत रखती हूं।

 

    पूनम शर्मा

चंद्रावल, दिल्ली

1+
Related Posts

Leave a Reply

Create Account



Log In Your Account