नाजायज औशिका-विकास विद्यार्थी

नाजायज औशिका-विकास विद्यार्थी

मैं एक समाज हूँ ।
रेश्मी कुर्तों वाला
सिंहासन वाला,
पढ़े लिखे ओहदों वाला,
मैं एक सभ्य समाज हूँ
तुम्हें खरीदने बेंचने वाला,और
बेल्लज दरिंदी आंखों वाला ।

क्या कर लोगे मेरा तुम ?
किसको तुम बतलाओगे
नापाक रिश्तों की अवैध सामान
नहीं तेरा कोई रखवाला,
केवल मैं ही एक घोरान हूँ
कच्ची फसल चरने वाला ।

दुबक शुबक कर रहा करोगी
तूम,मेरे ही आगोश में ;
जी भर कर मुझे प्यार करने दो
तेरे जिस्मों संग सरगोश में ।

और दो बातों का ध्यान रखना,
दिल(समाज) में नहीं उतर पाओगी,
कागज पर उतरती रहना
एक खामोश नदी के जैसे,
मेरे पापों को ढोती रहना ।
क्योंकि,
मैं एक सभ्य समाज हूँ
नाजायज औलादें जन्माने वाला और,
पुनः हवस का पूजा पाठ करने वाला ।

 

      विकास विद्यार्थी

ओबरा,औरंगबाद, बिहार

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